इस लेख में हम जानेंगे कि इसके आगे क्या होगा, कहां जाएगा? कब और क्यों?
सबसे पहले हम यह जाएंगे की L1 का मतलब क्या होता है_
एल का पूरा शब्द होता है लैग्रेंज, लैग्रेंज उस स्थान या बिंदु को कहते हैं जो कि दो पिंडों के बीच ऐसा स्थान है जहां वस्तु पर लगाया गया सभी बल समान हो जाते हैं, जैसे कि गुरुत्वाकर्षण बल और अभिकेन्द्रीय बल। हमारी पृथ्वी और सूर्य के आसपास ऐसे पांच लैग्रेंज स्थान हैं। इसमें पहले स्थान पर भेजा जा रहा है इसलिए इसका नाम लैग्रेंज1 है। "ऐसा मत समझिएगा कि १ पर भेजा जा रहा है तो पहली बार ही भेजा जा रहा है, मतलब एल2 पर अमेरिका द्वारा एक उपग्रह भेजा जा चुका है।"
आदित्य एल1, पूरे चार महीने की यात्रा के बाद 6 जनवरी 2024 को पृथ्वी से 1.5 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर स्थापित किया जाएगा जो कि चंद्रमा की दूरी से चार गुना अधिक दूरी पर है। चूँकि हम जानते हैं कि पृथ्वी से सूर्य की दूरी 150 मिलियन किलोमीटर है, और 1.5 मिलियन किलोमीटर की दूरी तय की जा रही है, तो हम कह सकते हैं कि पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी केवल एक प्रतिशत दूरी तय किया जा रहा है।
लैग्रेंज प्वाइंट पर स्थापित करने से यह लाभ होता है कि यहां सभी समान बल होने के कारण ईंधन की बचत होती है क्योंकि वस्तु पर लगाया गया बल ना के बराबर होता है या फिर बहुत ही कम बल लगता है।
आदित्य एल1 मिशन का उद्देश्य
(1) सूर्य के द्वारा विकिरण, ताप, कणो का प्रवाह चुंबकीय क्षेत्र आदि, हमारे ऊपर प्रभाव डालता है, इसके बारे में जानने का प्रयास। (2) सूर्य की ऊपरी परतें जैसे क्रोमोस्फियर और कोरोना का अध्ययन। (3) कोरोनल मास इंजेक्शन यानी कि जब डायनामाइट और चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन किया जाता है तो इस प्रक्रिया को ही 'सी.एम.आई' कहा जाता है। (4) जो सूर्य के चारों ओर कोरोना नाम की वायुमंडल है उसका तापमान मिलियंस डिग्री सेल्सियस में है जबकि इसकी सतह का तापमान 5500 डिग्री सेल्सियस में है ऐसा क्यों?
1 टिप्पणियाँ
Aise hi jankari dete raho 🙏👍👍