क्या आपने कभी सोचा कि हमारी पृथ्वी के अंदर कुछ ऐसा हो सकता है, जो किसी और ग्रह का हिस्सा हो? जी हाँ, वैज्ञानिकों ने अफ्रीका और पेसिफिक ओशन के नीचे दो विशाल "ब्लॉब्स" खोजे हैं, जो शायद किसी एलियन प्लैनेट के टुकड़े हो सकते हैं! यह कहानी थोड़ी साइंस-फिक्शन जैसी लगती है, लेकिन इसके पीछे ढेर सारी रिसर्च और सबूत भी हैं। तो चलिए, इस रहस्य को आसान और दोस्ताना अंदाज़ में समझते हैं।
ये ब्लॉब्स हैं क्या चीज़?
सबसे पहले बात करते हैं इन रहस्यमयी ब्लॉब्स की। ये दो विशाल स्ट्रक्चर्स हैं, जो पृथ्वी के मेंटल (यानी पृथ्वी की मोटी परत) में, कोर के पास मौजूद हैं। एक ब्लॉब अफ्रीका के नीचे है, जिसे वैज्ञानिकों ने टूजो नाम दिया, और दूसरा पेसिफिक ओशन के नीचे है, जिसका नाम है जेसन। ये दोनों इतने बड़े हैं कि किसी कॉन्टिनेंट जितने एरिया को कवर करते हैं। लेकिन सवाल ये है कि ये आए कहाँ से?वैज्ञानिकों का मानना है कि ये ब्लॉब्स सामान्य पत्थरों से बने नहीं हैं। इनकी बनावट और डेंसिटी पृथ्वी के बाकी मेंटल से बिल्कुल अलग है। तो क्या ये किसी और ग्रह के टुकड़े हो सकते हैं? यही सवाल वैज्ञानिकों को परेशान कर रहा था।
कहानी की शुरुआत: हवाई के ज्वालामुखी
इस रहस्य की शुरुआत हुई 1960 के दशक में, जब हवाई आइलैंड्स में तीन साल के अंदर आठ ज्वालामुखी फट गए। अब ये अजीब बात थी, क्योंकि ज्वालामुखी आमतौर पर टेक्टोनिक प्लेट्स की सीमाओं पर फटते हैं। लेकिन हवाई तो किसी भी टेक्टोनिक बाउंड्री से बहुत दूर है! फिर वहाँ इतने सक्रिय ज्वालामुखी क्यों?वैज्ञानिकों ने जब दुनिया के सभी ज्वालामुखी हॉटस्पॉट्स का नक्शा बनाया, तो उन्हें पता चला कि ज्यादातर हॉटस्पॉट्स दो जगहों पर केंद्रित हैं: अफ्रीका और पेसिफिक ओशन। उदाहरण के लिए, हवाई, साइबेरियन ट्रैप्स (रूस), और डेक्कन ट्रैप्स (भारत) जैसे इलाके इन हॉटस्पॉट्स से जुड़े हैं। लेकिन इन हॉटस्पॉट्स का राज़ क्या है? वैज्ञानिकों को शक हुआ कि पृथ्वी के मेंटल में कुछ ऐसा है, जो इन ज्वालामुखियों को ट्रिगर कर रहा है।
साइस्मिक वेव्स ने खोला राज़
अब सवाल था कि मेंटल के अंदर क्या हो रहा है? चूँकि हम सीधे पृथ्वी के अंदर नहीं जा सकते (रूस ने कोला सुपर डीप बोरहोल खोदकर सिर्फ 12 किमी तक ही जा पाया था), वैज्ञानिकों ने एक चतुर तरीका अपनाया। उन्होंने साइस्मिक वेव्स (भूकंप से निकलने वाली तरंगों) का इस्तेमाल किया।जब भूकंप आता है, तो ये तरंगें पृथ्वी के अंदर से होकर गुजरती हैं। अलग-अलग मटेरियल में इनकी स्पीड बदलती है। एमआईटी की प्रोफेसर काइटी अकी ने इन तरंगों की स्पीड को मापकर पृथ्वी का एक 2D मैप बनाया। और तभी कुछ चौंकाने वाला पता चला!अफ्रीका और पेसिफिक के नीचे मेंटल में साइस्मिक वेव्स की स्पीड अचानक कम हो रही थी। इसका मतलब था कि वहाँ कुछ ऐसा मटेरियल है, जो बाकी मेंटल से अलग है। यहीं से टूजो और जेसन ब्लॉब्स की खोज हुई।
क्या ये ब्लॉब्स ज्वालामुखियों का कारण हैं?
अब वैज्ञानिकों को शक हुआ कि शायद ये ब्लॉब्स ही ज्वालामुखी हॉटस्पॉट्स का कारण हैं। 1994 में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के दो वैज्ञानिकों, यू. आर. क्रिस्टनसन और एडब्ल्यू. हॉफमैन, ने एक थ्योरी दी। उनके मुताबिक:
(1) लाखों साल पहले, जब सुपरकॉन्टिनेंट पैंजिया टूट रहा था, तब समुद्री क्रस्ट (जो ज्यादा डेंस थी) मेंटल में धंस गई।
(2)वहाँ के तापमान और दबाव ने उस क्रस्ट को पिघलाया, और उसमें मौजूद पानी कोर के आयरन के साथ मिलकर आयरन पेरोक्साइड बना।
(3) ये पेरोक्साइड इतना डेंस था कि ये मेंटल और कोर की सीमा पर जमा हो गया, और धीरे-धीरे ब्लॉब्स बन गए।
(4) समय-समय पर ये डेंस मटेरियल क्रस्ट को तोड़कर बाहर निकलता है, जिससे ज्वालामुखी हॉटस्पॉट्स बनते हैं।
ये थ्योरी ब्लॉब्स और हॉटस्पॉट्स को तो जोड़ रही थी, लेकिन एक सवाल अनसुलझा रहा: ये ब्लॉब्स सिर्फ अफ्रीका और पेसिफिक के नीचे ही क्यों हैं?
एलियन प्लैनेट "थिया" की थ्योरी
2020 में कैलटेक यूनिवर्सिटी के जियोफिजिसिस्ट चियान युआन और उनकी टीम ने एक नई थ्योरी दी, जो सबको हैरान कर गई। उनके मुताबिक, ये ब्लॉब्स पृथ्वी के नहीं, बल्कि एक हाइपोथेटिकल एलियन प्लैनेट थिया के टुकड़े हैं!
लेकिन ये थिया है क्या?
1. करीब 4.5 बिलियन साल पहले, पृथ्वी एक मार्स के आकार के प्लैनेट थिया से टकराई थी।
2. इस टक्कर से: (1) पृथ्वी अपने एक्सिस पर टिल्ट हो गई। (2) थिया का एक बड़ा टुकड़ा टूटकर हमारा चाँद बना। (3) बाकी टुकड़े पृथ्वी के मेंटल में धंस गए, और यही टुकड़े आज टूजो और जेसन ब्लॉब्स हैं।
3. चूँकि थिया की डेंसिटी पृथ्वी से ज्यादा थी, इसके टुकड़े मेंटल के निचले हिस्से तक पहुँच गए।
लेकिन ये ब्लॉब्स अफ्रीका और पेसिफिक में ही क्यों हैं? वैज्ञानिकों का कहना है कि टक्कर के बाद पृथ्वी का रोटेशन टिल्ट हो गया था। इस टिल्ट को स्टेबल करने के लिए ये ब्लॉब्स एक-दूसरे के डायमेट्रिकली ऑपोजिट (यानी पृथ्वी के दो विपरीत छोरों पर) एलाइन हो गए, ठीक वैसे ही जैसे जायरोस्कोप में बैलेंस बनाया जाता है।
क्या इस थ्योरी पर भरोसा किया जा सकता है?
अब बड़ा सवाल: क्या ये थिया थ्योरी सच है? चियान युआन की टीम का दावा है कि उनके पास सबूत हैं। उन्होंने एक कंप्यूटर सिमुलेशन बनाया, जिसमें: (a) चाँद बन गया। (b) पृथ्वी पिघल गई। (c) थिया के टुकड़े कोर-मेंटल बाउंड्री तक पहुँचे।
ये सिमुलेशन आज की पृथ्वी के हालात से मिलता-जुलता है। लेकिन फिर भी, ये सिर्फ एक थ्योरी है। क्यों? क्योंकि:थिया के कोई फिजिकल सैंपल नहीं हैं। ब्लॉब्स तक कोई पहुँच नहीं सकता, क्योंकि वो पृथ्वी के कोर के पास हैं। सिमुलेशन भले ही सही हो, लेकिन ये 100% प्रूफ नहीं है।
ब्लॉब्स पृथ्वी के रोटेशन को कैसे बैलेंस करते हैं? एक और सवाल: इतने विशाल ब्लॉब्स पृथ्वी के अंदर हैं, फिर भी पृथ्वी का रोटेशन स्थिर कैसे है? वैज्ञानिकों का मानना है कि ये ब्लॉब्स एक-दूसरे के विपरीत होने की वजह से पृथ्वी के रोटेशन को बैलेंस करते हैं। जैसे जायरोस्कोप में वज़न को इस तरह रखा जाता है कि वो घूमता रहे, वैसे ही ये ब्लॉब्स पृथ्वी के टिल्ट को स्टेबल रखते हैं। अगर ये सिर्फ एक तरफ होते, तो शायद पृथ्वी का रोटेशन अस्थिर हो जाता।
तो क्या है निष्कर्ष?ये ब्लॉब्स और थिया की थ्योरी पृथ्वी के इतिहास का एक रोमांचक हिस्सा है। ये हमें बताती है कि हमारा ग्रह कितना जटिल और रहस्यमयी है। भले ही थिया थ्योरी अभी पूरी तरह सिद्ध न हो, लेकिन ये हॉटस्पॉट्स, ब्लॉब्स, और अफ्रीका-पेसिफिक के कनेक्शन को अच्छे से जोड़ती है। और साइंस का मज़ा यही है, ना? हर नई खोज हमें कुछ नया सोचने पर मजबूर करती है।तो अगली बार जब आप हवाई के ज्वालामुखियों या चाँद को देखें, तो सोचिएगा कि शायद ये सब एक एलियन प्लैनेट की कहानी का हिस्सा हैं!


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